आज मम्मी कुछ चिंतित दिखाई दे रही थीं. मैं भी सोच
रहा था कि आखिर क्या बात है. एक चिंता तो यह थी कि मेरी दीदी के संतान होने वाली
थी और हमारे यहाँ से जाने कि स्थिति में कोई न था. जीजाजी मद्रास के रहने वाले थे
और एक ऑफिसर थे. वह समाज से कटे हुए थे उनके बस का भी नहीं था कि किसी को देखभाल
के लिए बुला पाते, वोह बार बार मम्मी से शिकायत कर रहे थे कि किसी को भेजो एक
महिला की ज़रुरत है इधर. जीजाजी की माता और पिता की मृत्यु हो गयी थी. क्यूंकि
जीजाजी ख़ुफ़िया विभाग में अधिकारी थे तो वोह किसी अंजान स्त्री को इस काम के लिए
नही रख सकते थे और दूसरे मेरी शक्की दीदी वोह खुद किसी महिला को अपनी देखभाल के
लिए रखने को तैयार नहीं थी. क्यूंकि जीजू भी रोमांटिक मूड के व्यक्ति थे. जीजी
ठन्डे मिज़ाज की महिला थीं. यह शिकायत भी जीजू को हमेशा रही कि मेरी पत्नी ठंडी और
कोई साली भी नहीं.
आज मम्मी लगभग रोने के मूड में थी, बल्कि उनकी आँखों
से आंसू भी निकल आये बोलीं अगर तो लड़की होती तो मेरी यह समस्या दूर हो जाती. और
हाँ जीजा की यह भी शिकायत रही है कि कोई साली नहीं है और रीना सदा अपनी टीचिंग और
कॉलेज के कामों में बिजी रहती है.
मैंने मम्मी से कहा आप रो नहीं कुछ न कुछ समाधान
निकलेगा. अचानक मैंने कहा कि क्यूँ न मैं ही लड़की बनकर उधर पहुँच जाऊं. जीजा को
समझा देंगे और कह देंगे कि समाज को दिखाने के लिए कुछ दिन के लिए पवन को रख लो. मम्मी
चौंकी बोलीं तू लड़की बनकर जायेगा? फिर बोलीं हां यह ठीक रहेगा. तुझे वैसे भी कानों
में बालियाँ और लम्बे बाल रखने का शौक़ है और अंडरवियर के नाम पर भी तू सिल्की पैन्टी
ही पहनता हुआ नज़र आता है. दिन भर घर में घुसा रहता है. एक बार मैंने तुझे अपनी
साड़ी पहनते हुए भी देखा है. मैं थोडा नर्वस हुआ और कहा मम्मी आजकल सब चलता है.
बोली अच्छा रहने दे. पहले मैं रीना से बात करलूं कि क्या ऐसा करना ठीक रहेगा? वोह
भी अपने पति से बात कर लेगी कि कुछ समय के लिए पवन आ जायेगा जब डिलीवरी हो जाएगी
तो वोह वापिस चला जायेगा.
मम्मी ने फ़ोन
मिलाया तो दीदी बहुत खुश बोलीं हां भेज दो पवन को बस साड़ी पहनकर भेज देना और अपनी
सहेली से उसका makeup करवा देना. ऑय बस सलवार कमीज़ इत्यादि पहनकर भेज देना शेष
makeupमेकअप मैं करवा दूँगी. बचपन में बहुत बातें करे थे हम. वोह तो मेरे साथ
गुड्डे गुडिया भी खेलता था और हां वोह मेरी चड्डी भी पहनता था और मम्मी आपने भी
कभी उसकी अंडरवियर खरीद कर नहीं दी. हमेशा
मेरी वाली ही पहनती था. मम्मी बोलीं चुप भी कर. अब तुझे अपने कपडे उसे देने
पड़ेंगे. अब वोह अठारह साल का तो उस हिसाब से उसे ब्रा और पैन्टी भी अलग से दिवला
देना. उधर से दीदी बोली चिंता मत करो मोम. इधर मम्मी बोली देखो मैं अपनी पारलर
वाली सहेली को बुला लेती हूँ. छः महीने कम से कम रहना होगा तुमको उधर ऐसे ही. मुझे
अच्छा भी लग रहा था और दिल भी धड़क रहा था. ऐसा मुझे हमेशा होता था जब भी कोई साड़ी
या ब्रा पहनना होता था तो दिल कि धडकने बढ़ जाती थी.
रात के दस बजे
के बाद रीना आंटी आयी और मम्मी ने सारी बात बताई, वोह बोलीं यह ठीक किया आपने.
रिश्ते बनाये रखने के लिए बहुत कुछ करना पड़ा है लड़की वालों को. रीना आंटी ने मुझे
बुलाया और बोलीं देखो इस समय परिवार के लिए काम में आना एक बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी का
काम है. आज से आपको हम लड़की कि तरह संबोधित करेंगे जिससे अभी आपको आदत पड जाये.
पहले आप नहा कर आइये. यह वीत कि दो तुबे ले जाइये और यह ब्रा पैन्टी और पुरानी
नाईटी जो कि ब्लैक साटन कि है इसको पहन लेना. एक दम से ऐसा सुनकर मुझे तो शर्म सी
आने लगी. बोलीं पवन बिटिया जब आप तैयार हो तो शर्म कैसी.
मैंने सर झुकाए
हुए वो ब्रा पैन्टी का पैकेट उठाया और नाइटी उठाकर बाथरूम में चल पडी वहां शावर से
गुनगुने पानी से नहाई और हेयर रेमूवर क्रीम से अपने सारे बाल साफ़ किये और मेरी
त्वचा बहुत चिकनी और चमकदार सी दिखने लगी. फिर मैंने ब्रा पैन्टी का पैकेट खोला तो
उसमे चमकीली रेशमी मैरून साटन की ब्रा पैन्टी रखी हुई थी. वोह पैडेड थी और एक
ब्रैस्टफॉर्म भी रखी हुई थी उसमे उभरा हुआ निप्पल भी था. यह देखकर तो मेरे होश उड़
गए मुझे ऐसा लगा जैसे किसी रखैल को किसी सेठ के यहाँ रात रंगीन करने के लिए भेजा
जा रहा है. खैर मुझे क्या मुझे तो इन ड्रेस को देखकर ही ओर्गास्म हो गया जिसे
मैंने साफ़ किया और धीरे से पैन्टी चढ़ा ली पैन्टी की चमक और चिकनापन मेरे अन्दर एक
अजीब सा ज़नाना एहसास भर रहा था. खीर मैंने ब्रा पहनकर उसके हुक लगाये जिसकी मैं
एक्सपर्ट थी फिर उसमे ब्रैस्टफॉर्म रखी. फिर जल्दी से साटन की नाईटी पहन ली. अब
मुझे बाथरूम से बहार निकलते हुए शर्म भी आ रही थी खैर किसी तरह मैं बहार निकली तो
मम्मी बहुत खुश हुई बोली अरी मैंने तुझे बेवजह ही लड़के कि तरह रखा. रीना आंटी ने
कहा आपने इसके कूल्हों कि गोलाई देखी कैसे मटकते हुए हैं. मम्मी ने कहा अब बातें न
बना मेरी बिटिया के मेकअप कर.
सबसे पहले
उन्होंने piercingpiercingकान छेदने वाली गन से मेरे दोनों कान छेद दिए और उसमे
सोने की बालियाँ झंड कर दी जिससे मैं उनको उतार न सकूं दूसरे उन्होंने नाक छेड़ दी
उसमे चंडी की बाली झंड कर दी. मैंने कहा उतारने में दिक्क़त होगी. बोली बिटिया उतारने का समय बहुत देर
से आयेगा. फिर उन्होंने मेरी ऑय ब्रो बनानी शुरू कर दी और वोह इतने बारीक कर दी कि
मुझे अजीब सा लगा. लेकिन एक बात थी ऑय ब्रो के बनते ही मेरा चेहरा बिलकुल लड़की
जैसा लगने लगा. मेरे बाल कन्धों तक तो आते ही थे रीना आंटी ने उसपर ब्रश करके और
उनको साधना कट कर दिया. फिर उन्होंने हलकी फाउंडेशन लगाकर लिपस्टिक लगा दी और पाँव
और हाथों में नेल पेंट लगा दिया वोह भी डार्क मैरून कलर में. बोलीं हल्का ही
makeupमेकअप रखना होगा. फिर उन्होंने मम्मी से साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट लाने को कहा
और कहा थोडा साटन में हो पेटीकोट और साड़ी भी साटन या क्रेप में हो तो अच्छी लगेगी.
मेरे मुंह से निकल गया मम्मी दीदी वाली ऑरेंज कलर कि ठीक रहेगी और उसका ब्लाउज भी
मुझपर फिट आता है. मम्मी बोलीं तूने कब चेक किया कि ब्लाउज सही आता है मैं सकपका
गयी बोली अरे मम्मी एक बार वैसे ही tryट्राई किया था. बोलीं चल तू ही निकाल कर ला.
मैंने अन्दर जाकर निकाला. रीना आंटी बोलीं आप ब्लाउज और पेटीकोट पहनकर आ जाइए. मैं
अन्दर जाकर ब्लाउज और पेटीकोट पहन कर आ गयी तो रीना आंटी ने साड़ी पहनना शुरू किया
और साड़ी की चुन्नटें डालकर मुझे पहना दीं. वोह एक दो इंच की हील भी लाई थीं. उसको
पहने को कहा और फिर चलना सिखाने लगीं. बोलीं लड़कियों की तरह चाल बनाना पड़ता है.
लड़के ऐसे चलते हैं उन्हें ज़बरदस्ती चलवाया जा रहा है जबकि लडकियां चलने में आनंद
लेती हैं. फिर उन्होंने कहा थोड़ी हथेली सामने को रखनी होती है हाथ को झटके नहीं
देने होते हैं. चलने में जल्दी नहीं करनी है और कूल्हे खूब मटका कर चलने हैं. घर
में हर वक़्त खूब मटका कर चलना तब ही आदत पड़ेगी. क्यूंकि मर्द के कूल्हे ऐसे होते
हैं जैसे कमर से वेल्डिंग हो और औरत के कूल्हे ऐसे होते हैं जैसे कमर से लटके हों.
सख्ती ख़त्म करनी है आपकी पवन बिटिया अकड़ कर मत चला करो.
यह सब बातें
मुझे सपना सी लग रही थीं. हालाँकि हमारे यहाँ कोई ख़ास सख्ती नहीं थी लेकिन फिर भी
समाज का एक डर तो लगा रहता है इसलिए कभी खुले आम मैं ड्रेस होकर बाहर नहीं निकली.
कभी कभी ऐसा ज़रूर होता था कि सुबह को मैं बुर्का पहन कर ज़रूर निकल जाती थी और जैसे
ही मेरा एरिया निकलता था तो नकाब उठा देती थी और कोई मुझे देखकर मुझे लड़का नहीं
समझता था. कभी कभी तो ई-रिक्शा पर बैठी औरतों से लड़की की आवाज़ में बात भी कर लेती
थी और उनको पता भी नहीं चलता था कि मैं एक लड़का हूँ. मम्मी दस बजे तक उठती थीं
क्यूंकि उनको पैरालिसिस का अटैक हुआ था तो दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट की वजह से नींद
बहुत आती थी. मैं नौ बजे तक वापिस आ जाती थी.
अभी मद्रास
जाने में पंद्रह दिन थे उससे पहले मुझे लड़की जैसा बनने की प्रैक्टिस करनी थी. आजका
दिन तो ऐसे ही मम्मी के काम में हाथ बंटाने मेंबेत गया. अगले दिन सुबह को फिर
पारलर वाली आंटी आनी थी और दस बजे वोह आ गयी. मैंने खुद ही सुबह नाश्ता बनाया था.
कुछ कपडे भी मैंने ही धोने थे. कांच की चूड़ियाँ छन-छन बज रही थी जो मुझे बहुत
अच्छी लग रही थी ऊपर से हैवी पायल कि वजह से चलने में भी बहुत आवाज़ हो रही थी जो
मुझे भली मालूम दे रही थी. एंड अन्दर गरम सी मस्ती सी छा रही थी थोड़ी जीजाजी से
मिलने की चाहत पैदा होने लगी. यह पहली बार महसूस हुआ मुझे. जीजाजी जब भी घर आते थे
मुझसे थोडा आकर्षित रहते थे. एक आध्बार मज़ाक में मुझे किस भी करिया करते थे. मुझे
बड़ी शर्म आती थी.
पारलर वाली
औंटी ने मुझे इशारे से बुलाया और कहा कि यह चुपके से रख लेना बट प्लग है. तुम्हारी
चाल में लड़कापन है इसको अपने पीछे घुसकर फंसा लेना. इससे थोडा दर्द होगा लेकिन जब
अन्दर चला जायेगा तो नहीं होगा. जब तुम चलोगी तो हलके दर्द की वजह से तुम्हारी चाल
में मटक पैदा हो जाएगी. मैं समझ गया कि यह पारलर वाली भी चालू टाइप की है हो सकता
है इनके पास ऐसे चिकने लड़के आते हों. खैर मैंने शरमाते हुए वोह आइटम ले लिया और
बाथरूम में जाकर उसको पीछे घुसाया तो दर्द तो हुआ मगर जब वोह घुस गया तो बड़ा अच्छा
महसूस हुआ ऊपर से मैंने पैन्टी पहन ली और फिर उपर से नाइटी पिंक साटन की नाईटी.
फिर जो चाल बनी तो बट प्लग कीवजह से कुल्हे खुद बा खुद ही दायें बाएं घूमने लगे.
मुझे औंटी का यह टोटका पसंद आया. नाईटी थोड़ी ट्रांसपेरेंट थी उसमे मेरी
काले रंगकी ब्रा की पट्टियाँ साफ़ दिख रही थी. मुझे अजीब सी शर्म भी अ रही थी और
गुदगुदी भी लग रही थी.
किसी तरह एक
महीना पूरा हुआ. उधर जीजू के फ़ोन भी लगातार आ रहे थे. कि कब भेज रहे हो पवन को.
मैंने जाने कि तय्यारी कर ली. मम्मी ने सिल्क कि सलवार कमीज़, nightyनाईटी,
लहंगा,स्कर्ट, पैन्टी-ब्रा मेरी नाप की, पीरियड्स पैड (शुरुर में मेरी समझ में
नहीं आया लेकिन बाद में मैं समझ गयी) प्लाज्जो, तिल के तेल की शीशी और साड़ी मैचिंग
ब्लाउज के साथ, पेटीकोट, मेकअप का सामान और तीन विग भी रख दिए थे. मुझे अब लगने
लगा कि यह दीदी की सेवा कम और भूखे जीजू की और मेरी सुहागरात कि तय्यारी ज्यादा
है. लेकिन मैंने सोच लिया था कि जो होगा देखा जायेगा मैं भी दीदी कि सहमती से उनकी
रखैल ही बन जाऊंगी.
मेरा टिकेट
लेडी के रूप में कराया. सुबह ही हल्का makeumakeupमेकअप करके एक ग्रीन कलर की
सिल्क साड़ी मैंने पहनी उसमे मैर्चिंग ब्लाउज सिल्वर कलर रेडीमेड स्ट्रचएबल pपहना
अन्दर ब्रैस्टफॉर्म 38Ccसी और इसी नाप कि काली साटन ब्रा की काली साटिन कि ब्रा
पहनी थी. इसे पहनकर मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा था. मम्मी भी मुझसे ड्रेस करने में
मदद कर रही थी, इस दौरान मम्मी के साथ कभी कभी मार्किट भी जाना हुआ जहाँ पर मैं
स्त्री के रूप में ही स्वीकारा गया. मम्मी को कभी कभी अटपटा सा भी लगा लेकिन बेटी
के आगे और मेरी सहमती के आगे उन्होंने मुझे बेटी के रूप में स्वीकार कर लिया और अब
वोह इतनी आदी हो गयी थीं कि मुझे पवन बिटिया के संबोधन से ही पुकारना शुरू कर दिया
था जिसकी मुझे आदत सी पड़ गयी थी. कॉलोनी में किसी से ऐसी कोई बातचीत नहीं थी कि कोई देखता कि यह नयी
लड़की कौन है.
खैर जब मैंने
देख्लिये कि मेरा makeup मेकअप और ड्रेसिंग ठीक हो गया है तो मैं थोडा धड़कते दिन से घर से
बाहर निकली मम्मी ने मेरी साड़ी ठीक की. बोली अब ठीक है कोई नहीं कह सकता कि तुम
लड़का हो. लड़कियों से ज्यादा सेक्सी दिख रही हो. मैं शरमाई और घर से निकल पडी एक
ऑटो वाले को अवाज़ दी उसने कहा किधर जाना है मैंने कहा रेलवे स्टेशन बोला ठीक है
मैडम. मैडम शब्द सुनकर मुझे बहुत सुख का अनुभव हुआ. रेलवे स्टेशन आ गया और मैंने
प्लेटफार्म पर रखी कुर्सियों पर बैठकर इंतज़ार किया. वहाँ और लेडीज भी थीं, एक लेडी
जो मेरे पास बैठी थी उसने मुझसे मेरे पर्स के बारे में पूछा कि कितने का कहाँ से
लिया है. मैंने बताया कि यह feminaaz शेळी ब्यूटी प्लस से खरीदा था. बोली आप पर
बहुत अच्छा लग रहा है. मैंने थंक्स कहा. थोडा दिल भी धड़क रहा ता कि कहीं उसे शक न
हो जाये. खैर इतने में ट्रेन आया गयी. ट्रेन में भीड़ ज्यादा नहीं थी. उस लेडी को
भी कंपुय्र ही जाना था. और जब मैं ट्रेन में घुसी तो वोह लेडी भी मेरे पीछे पीछे
आकर मेरे पास बैठ गयी और फिर उसने शुरू कर दी अपने घर कि कहानी. तीन घंटे का सफ़र
था मैं भी थोड़ी रिलैक्स हो गयी और उसने मेरा नाम और पता भी लिया. बोली आपका
व्यहवार बहुत अच्छा है.
खैर कानपुर आ
गया मैंने उससे विदा ली और ट्रेन से उतर गयी. स्टेशन से बाहर आकर ऑटो किया और किशन
कॉलोनी कि और चल पडी. ऑटो में मैंने अपनी लिपस्टिक को थोडा ठीक किया और ब्रा का
स्ट्रप थोडा ब्लाउज से बाहर दिख रहा था. मुझे वोह ठीक सा लगा मैंने उसे अन्दर नहीं
किया.
दीदी कि कॉलोनी
आ गयी फर्स्ट फ्लोर पर उनका फ्लैट था. मैंने डोर बेल बजायी दीदी बाहर आयीं और
देखकर गले लगा लिया. उन्हें पहचानने में कोई दिक्कत नहीं हुई क्यूंकि मेरे फीमेल
फ़ोटो उन्होंने पहले ही शेयर कर रखे थे. अन्दर से जीजू भी आये और देखकर फूले नहीं
समाए. बोले चलो अच्छा हुआ तुम आ गयी अब हमारे दिन सही कट जायेंगे. मैं समझ गयी कि
इनके कहने का क्या मकसद है.
घर थोडा बिखरा
शा पडा था शायद दीदी ग्याभन होने के कारण सुस्त हो गयी थी. दीदी ने इतने में कहा
कि खाना खा लेना और थोडा हाथ मुंह धो लेना. अगर सलवार कमीज़ पहनना चाहती हो तो मेरे
वार्डरोब में रखे हैं बहुत सारे तुम ले लेना अब तो मैं पहनती नहीं हूँ. मैंने ok
कहा ठीक है, दीदी देख लूंगी. दीदी मुझे एकटक देख रही थी. जीजी बोलीं खाना लेकर आती
हूँ तू खाना खा ले फिर ढेर साड़ी बातें करेंगे.
खाना खाकर मैं
और दीदी एक रूम में आ गए. जीजू अपने कमरे में सोने चले गए.
दीदी बोलीं
देखो तुम्हें बुलाने के पीछे मेरे कई उद्देश्य हैं. एक तो यह बात कि मेरी कोई बहन
नहीं है तो तेरे जीजू ताना मारते हैं. मम्मी ने तुम्हें बताया ही होगा. दूसरे यह
कि यह सेक्स एडिक्ट हैं. इन्हें अगर सेक्स न मिले तो मुझे मारते भी थे. तीसरे यह
कि हमन किसी लड़की को इनके पास भेज भी नहीं सकते अगर इन्होने उससे शादी कर ली तो
मेरे लिए दिक्कत हो जाएगी.
जहां तक
तुम्हारा मैटर है तुम्हारा रुझान मुझे मालूम है. तुम लड़का कम लड़की ज्यादा हो. बचपन
में तुमने मेरी ही पैन्टी पसंद आती थी और कई बार मैंने तुम्हें मेरी फ्रॉक पहनते
हुए कई बार पकड़ा था. फिर मैंने भी टोकना छोड़ दिया था. तो तुम्हें अच्छा ही लगेगा
अगर जीजू तुम्हे अपनी दूसरी पत्नी या रखैल कि तरह रख लें. मुझे इसमें कोई दिक्कत
नहीं है जीजू कि उम्र भी अभी 22 साल है तुम्हारी 19 होगी. हम दोनों बहनों कि तरह
रह सकते हैं. हां मुझे सेक्स में कोई ख़ास दिलचस्पी कभी रही नहीं. मैं स्टडी करने
कि शौकीन हूँ. कॉलेज में लेक्चर देना होता है. पूरा दिन मेरा बिजी रहता है और शाम
को मैं थक जाती हूँ.
तुम जीजू में
अपनी दिलचस्पी तलाश कर सकती हो. वोह तुम्हें पसंद भी करते हैं. उनसे मैंने कहा कि
दुल्हन वाला लहंगा चोली दिलवा देना पवन को तो वोह तुरन तैयार हो गए. उन्होंने
तुम्हारे लिए गरारा, शरारा, लहंगा , साड़ी ब्लाउज सब तैयार करवा रखा है. अगर तुम
देखोगी तो नाईटी भी बारह लीं हैं देखने में सेक्सी साटन की जिसमे से बदन झलके. यह
सुनकर तो मुझे शर्म भी आई और मेरे मुंह से निकला दीदी मेरे से तो यह सब नहीं होगा.
बोली तुझे कुछ नहीं करना है जो करेंगे जीजू अक्रेंगे. शाम को नौ बजे पारलर वाली को
भी बुलवाया है. वोह तुझे पूरा दुल्हन बना देगी. इतना सुनकर तो मेरी पैन्टी भी गीली
होने को तैयार थी. मेरे दिल में लड्डू फूट रहे थे. लेकिन मैं दिखाया ऐसे जैसे दीदी
पर एहसान कर रही हूँ.
मैंने थोड़ी
नींद ली. दीदी ने एक नाईटी लाकर दी मैंने साड़ी उतारकर उसको पहन लिया. आता बजकर दस
मिनट पर पारलर वाली भी आ गयी. उसने आकर फेसिअल ऑय ब्रो को और बारीक कर दिया.
थ्रेडिंग से चेहरे के अनचाहे बाल भी हटा दिए. मैनीक्योर padicureपैडीक्युर भी कर
दिया और एक दुल्हन जैसा makeमेकupअप कर दिया. अन्दर से दीदी सिल्वर कलर कि तीन इंच
की हील लाई और लहंगा चुन्नी पहनाया और मुझे पूरी तरह तैयार कर दिया. जीजू एक दो
बार इधर ए और मुझे देखकर आँख मारकर चले गए. मुझे घबराहट और ख़ुशी दोनों मह्सूस हो
रही थी.
दस बजे तक मैं पूरी तरह नई नवेली दुल्हन कि तरह तैयार हो
गयी. पारलर वाली को ग्यारह हज़ार रूपये खुद जीजू ने दिए. दीदी ने कहा कि तुम अभी
जाकर जीजू के कमरे में पहुँच जाओ. मुझे बहुत थकान है सोने जा रही हूँ. मैं शरमाते
हुए जीजू के कमरे पहुँच गयी और जीजू वही थे जीजू ने कमरा अन्दर से बंद कर लिया.
मैं डबल बेड पर सर झुकाए बैठी थी. जीजू आये और उन्होंने घूंघट उठाया और कहा आपको
मैं बहुत पहले से ही चाहता हूँ. तेरी दीदी हर काम में ठीक है लेकिन बिस्तर पर ठंडी
रहती है. मगर तुझे देखकर लगता है मेरा जीवनस अफल हो गया, इतना कहकर उन्होंने मेरे
होंठों पर अपने होठ रख दिए और ऐसे रखे जैसे अब छोड़ेंगे भी नहीं.
मैं कसमसाई और
कहा बहुत आग है. थोडा सब्र रखिये. बोले अब नहीं होता मेरी जान मेरी रानी. इतना
कहकर उन्होंने मेरी चुनरी हटा दी. और चोली भी खोलने लगे और एकदम से चोली उत्तर दी
अन्दर मेरी मैरून रंग की साटन की ब्रा चमकने लगी जीजू ने अपने दोनों हाथों से मेरी
पम्पिंग करनी शुरू कर दी. मैं फ़ौरन जीजू के सीने से लग गयी जीजू मेरे सर पर हाथ
फेरने लगे. और अचानक उन्होंने मेरे लहंगे का नाडा खोल दिया. उसके नीचे पिंक साटन
का चूडीदार पायजामा था जीजू ने उसका भी नाडा खोल दिया औ नीचे खिसका दिया अब मैं
काले साटन की पेंटी में थी. जीजू ने मुझसे कमर के बल लेटने को कहा. मैं चुपचाप लेट
गयी और उन्होंने पीछे से मेरे दोनों बूब हाथ से पकड़ लिए और उन्हें आटे की तारह
गूंधने लगे. अब मेरी आहें निकलने लगीं. मैं पिघलने लगी. इसी बीच जीजू ने मेरी हॉट
पेन्टी नीचे खिसकाई तो मेरी चिकनी गोरी गांड देखकर जीजू पागल से हो उठे उन्होंने
अपना मुंह उसमें घुसेड दिया और जीभ से चाटने लगा. इतनी मस्ती मुझे अपनी ज़िन्दगी
में कभी नहीं आयी थी. मैंने जीजू से अन्दर आने की भीख मांगनी शुरू कर दी.
हाय मेरे राजा
मेरी ले लो ना. प्लीज मुझे चोदिये ना. मैं आपकी बीवी हूँ आपके सारे काम करूंगी.
मुझे अपनी रखैल बना लीजिये. जीजू भी सांड की तरह हांपने लगे और बोले मेरी रानी तू
अब मेरे पास हमेशा के लिए रहेगी. बोल रहेगी ना.
मैंने भी कहा
हां मेरे राजा अब यहाँ से नहीं जाऊंगी कहीं. इतना कहते ही जीजू ने तिल के तेल कि
शीशी निकाली और मेरी महारानी में दाल दी और ऊँगली के द्वारा अन्दर की मालिश करने
लगा. इससे तो मेरे बदन और
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